उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) में 69,000 शिक्षकों की भर्ती (Shikshak Bharti) का मामला निपटने का नाम नहीं ले रहा। एक बार मामला फिर से हाई कोर्ट पहुंचा है और इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ (Lucknow) बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुई भर्ती पर फिलहाल रोक लगा दी है।

हाइलाइट्स
  • जनवरी 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में निकाले थे पद
  • 69000 शिक्षकों की भर्ती के लिए 4 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा
  • कटऑफ को लेकर हुआ था विवाद, मामला पहुंचा था हाई कोर्ट
  • इससे पहले हाई कोर्ट ने तीन महीने के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का दिया था आदेश
  • अब लखनऊ बेंच में पहुंचा मामला, बेंच ने राज्य सरकार और यूजीसी से पूछ सवाल

उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षकों की भर्ती एक बार फिर लटक गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। बुधवार से भर्ती को लेकर काउंसलिंग शुरू होनी थी, लेकिन उससे पहले ही अदालत का आदेश आ गया। हाई कोर्ट ने कहा कि विवादित प्रश्नों पर आपत्तियों को अभ्यर्थी एक सप्ताह के अंदर राज्य सरकार के सामने प्रस्तुत करें। सरकार आपत्तियों को निपटारे के लिए यूजीसी को भेजे। मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 12 जुलाई रखी गई है।

उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में 69,000 शिक्षकों की भर्ती का मामला निपटने का नाम नहीं ले रहा। तमाम इंतजार के बाद बुधवार से राज्य के सभी डायटों पर काउंसलिंग शुरू होनी थी लेकिन उससे पहले ही हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर की गई याचिका को लेकर हाई कोर्ट ने यह रोक लगाई है।

हाई कोर्ट लखनऊ की बेंच में कोर्ट नंबर 26 में मामले की सुनवाई की गई। यह याचिका अमिता त्रिपाठी और अन्य की ओर से दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि यूजीसी के चेयरमैन को पत्र लिखकर सारे विवादित प्रश्नों पर एक्सपर्ट ओपिनियन लिया जाएगा। एक्सपर्ट का ओपिनियन आने के बाद अब आगे फैसला होगा।

क्या है मामला?

दरअसल बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए छह जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा कराई गई थी। इन पदों के लिए करीब चार लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। परीक्षा के बाद सरकार ने भर्ती का कटऑफ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत की अनिवार्यता के साथ तय की थी। इस आदेश को लेकर अभ्यार्थियों ने हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी थी।

डबल बेंच ने सुनाया था फैसला

याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि सरकारी नियमों के हिसाब से भर्ती के लिए डाली गई याचिका पर सुनवाई हो और महाधिवक्ता हर सुनवाई में मौजूद रहें। हाई कोर्ट की एकल पीठ में इस तरह कई याचिकाएं दायर हुईं। एकल पीठ के फैसले को पुनर्याचिका के लिए दायर किया था। जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने 6 मई को केस में फैसला सुनाया था।

तीन महीने में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के थे आदेश

हाई कोर्ट ने 6 मई को आदेश दिया था कि शिक्षक भर्ती सरकार के तय मानकों के आधार पर ही होगी। इसी के साथ कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि भर्ती प्रक्रिया अगले तीन महीने के अंदर पूरी कर ली जाए। हालांकि यह केस एक बार फिर से कोर्ट पहुंच गया और अब अदालत ने यह फैसला दिया।