सीबीएसई की शेष परीक्षाएं 2 जुलाई से कराईं जाए या नहीं, इस पर अब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। दरअसल सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सीबीएसई की शेष परीक्षाएं 1 जुलाई से कराईं जाएं या नहीं इस पर फैसला एंडवांस स्टेज की प्रक्रिया में है। इसलिए कोर्ट ने सीबीएसई के निवेदन पर अब सुनवाई को 25 जून दोपहर 2 बजे तक के लिए टाल दिया है। वहीं आईसीएसई ने भी सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि वो भी सीबीएसई के फैसले को मानेगा।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने मानव संसाधन मंत्रालय और सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर सुनवाई गुरुवार अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

मेहता ने कहा कि सरकार इस मसले पर विचार कर रही है और बुधवार शाम तक इस पर निर्णय ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्णय की प्रक्रिया काफी आगे पहुंच चुकी है। बुधवार शाम तक औपचारिक निर्णय ले लिया जाएगा। हम विद्यार्थियों की चिंता से वाकिफ हैं। हम कोर्ट को निर्णय के बारे में परसों सूचित कर सकते हैं। इस मामले की सुनवाई को गुरुवार दो बजे मामले की सुनवाई करेंगे। आईसीएसई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कहा कि वह सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के मामले में आदेश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने शीर्ष अदालत में आज होने वाली सुनवाई के मद्देनजर अपने यहां सुनवाई स्थगित कर दी है। न्यायालय ने इस पर श्री गुप्ता से सवाल किया कि क्या आईसीएसई उस निर्णय को मानेगी जो केंद्र सरकार या सीबीएसई की ओर से लिए जाएंगे। इसका श्री गुप्ता ने ‘हां’ में जवाब दिया।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से पिछले सप्ताह कहा था कि वह 10वीं 12वीं की बची परीक्षाएं रद्द करने और इंटरनल असेसमेंट के आधार पर रिजल्ट जारी करने के अनुरोध पर विचार करे। कोर्ट ने सीबीएसई को इसके लिए मंगलवार यानी आज (23 जून) तक का समय दिया था। कोविड-19 की महामारी के कारण ये परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं। बोर्ड ने पिछले सप्ताह अदालत को बताया था कि वह जल्द ही फैसला लेगा।

कुछ अभिभावकों के एक समूह ने 10वीं और 12वीं कक्षा की बाकी परीक्षाएं 01 से 15 जुलाई तक आयोजित कराने की अधिसूचना को रद्द करने को लेकर याचिका दाखिल की थी। छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) या व्यावहारिक परीक्षाओं के लिए दिए गए अंक के आधार पर अंक प्रदान करने के लिए भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। महाराष्ट्र, दिल्ली और ओडिशा की सरकारों ने भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय से ऐसा ही अनुरोध किया है। अभिभावकों ने याचिका में कहा है कि कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के बीच परीक्षाओं में बैठने पर छात्रों के संक्रमित होने का खतरा रहेगा।

बताया जा रहा है कि अगर सीबीएसई 10वीं 12वीं की शेष परीक्षाएं रद्द करता है तो इंटरनल असेसमेंट के आधार पर स्टूडेंट्स को ग्रेड दिए जा सकते हैं। यह ग्रेडिंग सिस्टम पूरे देश में लागू होगा। ग्रेड देते समय उन पेपरों में स्टूडेंट्स का प्रदर्शन देखा जा सकता है जो हो चुके हैं।