पीपीई किट सप्लाई की थी कमी, तो कोरोना वॉरियर डॉक्टरों से खुद तैयार कर ली, वो भी बाजार से तीन गुना सस्ती

कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है। पूरी दुनिया को संक्रमण की चपेट में ले चुके कोरोना के चलते अब डॉक्टर्स के बीच पीपीई किट की कमी का संकट भी आ चुका है, लिहाजा जयपुर के डॉक्टरों ने इस समस्या से निजात पाने के लिए खुद पर्सनल प्रोटेक्टिव किट यानी पीपीई किट तैयार कर ली है, जो बाजार से तीन गुना सस्ती है।

मुख्य बिंदु

  • जे के लॉन अस्पताल के डॉक्टरों ने तैयार की किट
  • बाजार से तीन है सस्ती
  • ड्यूटी के साथ किया रिसर्च पर भी फोकस
  • बन रही है डेली 100 से 150 किट
  • अस्पताल के पास 500 पहले से

जयपुर: दुनियाभर में कोरोना से लड़ रहे हेल्थवर्कर्स को लेकर चिंता जताई जा रही है। कोरोना को हराने की जंग में लगे सिपाहियों के बीच अब पर्सनल प्रोटिक्टव किट यानी पीपीई किट की कमी से भी जूझना पड़ रहा है। लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचाने वाले वॉरियर्स ने अब इसका जिम्मा भी अपने कंधों पर ले लिया है। ऐसी ही एक सुखद खबर जयपुर से हैं, दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में पीपीई किट की कमी आ गई है, लिहाजा पिंकसिटी के डॉक्टर्स ने खुद इनेशिएटिव लेते हुए पीपीई किट का मॉडल तैयार किया है। जेके लॉन अस्पताल के डॉक्टरों की ओर से बनाया गया यह किट तीन गुना सस्ता भी है।

जेके लॉन अस्पताल के सहायक प्रोसेफर डॉ. योगेश यादव ने बताया कि इस किट को हमने हॉस्पीटल अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता के निर्देशन में तैयार किया है। साथ ही इसका डिजाइन तैयार कर दो वेंडर्स को भी दे दिया है, जो इसके प्रोडेक्शन पर वर्क कर रहे हैं। रोजाना 100 से 150 किट्स का प्रोडेक्शन हो रहा है, जिसमें से अभी अस्पताल को 500 किट वितरित करवाए गए हैं। आपको बता दें कि जेके लॉन अस्पताल जिले का चाइल्ड केयर सरकारी अस्पताल है।

सात दिन से आ रही है सप्लाई

अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि इस किट की सप्लाई पिछले सात दिनों से आ रही है। यह किट सभी इंटरनेशनल मानकों पर खरा उतरा है। पहले इसकी क्वालिटी चेक की गई है। किट पहनने औरर उतारने में सुविधाजनक है।

कोरोना डयूटी के साथ की रिसर्च

डॉ. योगेश ने बताया कि इस नए किट के इंनोवेशन के पीछे यही कहा जा सकता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। क्योंकि मेरी ड्यूटी भी कोरोना में लगी थी, लिहाजा देखने को मिल रहा था कि पीपीई किट की कमी आ रही है, लिहाजा मैंने इस पर विचार किया । इंटरनेट पर इससे जुड़े कंटेंट को पढ़ा और ड्यूटी के साथ इस रिसर्च को भी समय दिया, आज यह उसी का परिणाम है।

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