• बीते उेढ़ वर्ष से कटऑफ अंक विवाद को लेकर कोर्ट में फंसी थी भर्ती प्रक्रिया
  • चार लाख अभ्यर्थी कोर्ट के फैसले का कर रहे थे इंतजार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के कटऑफ अंक विवाद पर अपना अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल व न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सरकार द्वारा तय किए गए मानकों पर अपनी मुहर लगाई है। बेंच ने तीन माह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने का आदेश दिया है। यह भर्ती प्रक्रिया बीते डेढ़ साल से अटकी थी। प्रदेश के करीब 4 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी निर्णय का इंतजार कर रहे थे।

4,10,440 परीक्षार्थियों ने दी थी परीक्षा

दरअसल, सूबे के परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए 5 दिसंबर 2018 को शासनादेश जारी कर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। छह दिसंबर से 20 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए। इसके बाद छह जनवरी 2019 को राज्य के 800 परीक्षा केंद्रों पर 4,10,440 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। 21 हजार 26 परीक्षार्थी गैर हाजिर रहे।

यह तय किया गया था कटऑफ

भर्ती विज्ञापन में न्यूनतम कटऑफ अंक की बात तो की गई थी, लेकिन कटऑफ कितने प्रतिशत होगा, इसका जिक्र शासनादेश में नहीं किया गया था। लिखित परीक्षा के अगले दिनन सात दिसंबर 2019 को न्यूनतम कटऑफ की घोषणा की गई। इसके तहत सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 150 में से 97 (65 फीसदी) और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 150 में 90 अंक (60 फीसदी) लाने होंगे। इसी कटऑफ को लेकर परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई के बाद 3 मार्च 2020 को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

अभ्यर्थियों की यह थी मांग

दरअसल, सितंबर 2018 में 68,500 शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में सामान्य व ओबीसी वर्ग के लिए 45 और आरक्षित वर्ग के लिए 40 फीसदी कटऑफ अंक तय हुआ था। अभ्यर्थियों का एक वर्ग पुराने कटऑफ अंक लागू करने की मांग कर रहा था तो वहीं कई अभ्यर्थी शासन की ओर से जारी कटऑफ अंक के पक्ष में थे।

शिक्षामित्रों के हाथ से फिसले दो मौके

बता दें हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों के हाथ से दो अब्दे मौके निकल गए हैं. 2017 व 2018 की टीईटी में शिक्षामित्रों से अलग से सूचना ली गई थी क्योंकि उसी के आधार पर उन्हें भर्ती में वेटेज दिया जाना था. 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बगैर टीईटी सहायक अध्यापक पद पर 1,37,517 शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त करते हुए प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि दो भर्तियों में इन्हें अनुभव का लाभ देकर अवसर दिया जाए. उसके छह महीने बाद 17 जनवरी 2018 को सरकार ने 68500 शिक्षकों की भर्ती के लिए पहली बार सहायक अध्यापक की लिखित परीक्षा का आदेश जारी किया.

27 मई को आयोजित लिखित परीक्षा में तकरीबन 7200 शिक्षामित्र पास हुए थे. जिन्हें 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में मौका मिला. उसके बाद 6 जनवरी 2019 को 69000 शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा कराई गई लेकिन कटऑफ अंक को लेकर विवाद हो गया और परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय 11 महीने में अंतिम उत्तरकुंजी जारी नहीं कर सका है. इस तरह से शिक्षामित्रों के हाथों से दो मौके तो चले गए लेकिन नौकरी तकरीबन सात हजार शिक्षामित्रों को ही मिल सकी है.

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